Jeevan chakra p kavita…🖋️

   *जीवन चक्र*

जीवन के इस चक्र में,

ऐसे लोगों को देखा हैं।

कुछ स्वार्थवान, कुछ स्वार्थहीन।

अपने कहने को अपने थे,

मन में भरे ईर्ष्या थे।

ये जीवन चक्र बड़ा दर्पण,

इन में लोगों को देखा हैं।

क्या कहु किससे कहु,

कोई हैं ना सुनने को।

ये खुदा अब तु ही बता,

क्या ख़ता हुई हैं मुझसे।

लोगों को खुश कर न पाए,

यही भूल हुई हैं हमसे।

मेरे सोचने से क्या, ऐ ख़ुदा

सोचा कुछ, किया कुछ और हुआ कुछ ।

कुछ साथ हैं कुछ छोड़ गए,

इन सुनसान रहो में।

ये जीवन चक्र बहुत बड़ा,

हम गुम गए इन रहो में,

हम गुम हुऐ इन रहो में।।

                        *Shahana Bano*🖋️

Leave a Comment